यूक्रेन और रूस के बीच हुए विवाद के बाद अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अपने रूसी समकक्ष व्लादिमीर पुतिन के साथ प्रस्तावित बैठक को रद्द कर दिया है.
रविवार को क्राइमियाई प्रायद्वीप में रूसी सैनिकों ने यूक्रेन नौसेना के जहाज़ों पर फ़ायरिंग कर दी थी और उन्हें कब्ज़े में ले लिया था.
ट्रंप ने कहा कि वह हाल में होने वाले जी-20 सम्मेलन में पुतिन से नहीं मिलेंगे. उन्होंने कहा कि "यह इस कारण है क्योंकि जहाज़ और उसके नाविकों को अब तक वापस नहीं भेजा गया है."
वहीं, जर्मन चांसलर एंगेला मार्केल ने इस घटना के लिए 'पूरी तरह' रूस को ज़िम्मेदार ठहराया है.
उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे को जी-20 सम्मेलन में राष्ट्रपति पुतिन के आगे उठाइंगी. जी-20 सम्मेलन शुक्रवार से अर्जेंटीना में शुरू होने जा रहा है.
यूक्रेन के राष्ट्रपति पेट्रो पोरोशेंको नाटो से अनुरोध कर चुके हैं कि उस इलाक़े में जहाज़ भेजे जाएं. इस संकट के मद्देनज़र उन्होंने यूक्रेन के सीमाई क्षेत्रों में 30 दिनों का मार्शल लॉ लागू कर दिया है.
गुरुवार को उन्होंने घोषणा की थी कि यूक्रेन में रह रहे रूसियों को बैंक से पैसे निकालने, विदेश मुद्रा बदलने और विदेश यात्रा करने पर पाबंदियों का सामना करना होगा.
क्राइमिया में क्या हुआ था?
रूस और यूक्रेन के बीच हुआ ये संघर्ष क्राइमिया और रूस के बीच पड़ने वाले कर्च स्ट्रेट यानि एक तंग जल मार्ग पर हुआ है.
रविवार की सुबह यूक्रेन की नौसेना के दो बंदूकों से लैस जहाज़ और एक नौकाओं को खींचने वाला जहाज़ इस रास्ते से होकर आज़ोफ़ सागर में स्थित बंदरगाह शहर मेरीपोल में पहुंचने की कोशिश कर रहा था.
साल 2003 में रूस और यूक्रेन के बीच एक संधि हुई थी जिसके तहत कर्च के तंग समुद्री रास्ते और अज़ोव सागर के बीच जल सीमाएं बांट दी गई थीं.
लेकिन, हाल ही में रूस ने यूक्रेन के बंदरगाह शहर से आने वाले जहाज़ों की जांच करना शुरू कर दिया है.
कर्च स्ट्रेट रूस और क्राइमिया को अलग करता है. क्राइमिया यूक्रेनियाई प्रायद्वीप का हिस्सा है जिस पर 2014 में रूस ने कब्ज़ा कर लिया था.
यूक्रेन का कहना है कि रूस जान-बूझकर मेरिपोल और अज़ोफ़ सागर में बर्डियांस्क जैसे बंदरगाहों की नाकेबंदी कर रहा है.
हिरासत में लिए गए 24 यूक्रेनियाई नाविकों को क्राइमिया की कोर्ट ने मुकदमा शुरू होने से पहले दो महीने के लिए नज़रबंद कर दिया है.
वहीं, रूस का इस मामले को लेकर कहना है कि यूक्रेनिया के प्रशासन ने उसे समुद्री संघर्ष को लेकर उकसाया है. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इसकी वजह बताते हुए कहते हैं कि यूक्रेनिया में राष्ट्रपति चुनाव होने वाले हैं.
यूक्रेनिया के वर्तमान राष्ट्रपति पोरोशेंको की लोकप्रियता की रेटिंग काफ़ी गिर चुकी है. कीएफ़ पोस्ट अख़बार के अनुसार, हाल के चुनावी सर्वे बताते हैं कि अगले साल पोरोशेंको को केवल 10 फ़ीसदी लोग वोट करेंगे जबकि 50 फ़ीसदी का कहना है कि वह किसी भी सूरत में उन्हें वोट नहीं देंगे.
Thursday, November 29, 2018
Thursday, November 15, 2018
पीड़ित परिवार ने वकील दीपिका सिंह को हटाया, जानिए क्यों
कठुआ गैंगरेप और हत्या मामले में पीड़िता के परिवार ने वकील दीपिका सिंह राजावत को हटा दिया है. बताया जा रहा है कि दीपिका के पास कोर्ट में सुनवाई के दौरान पेश होने का समय नहीं था. पठानकोट कोर्ट में हुई 110 सुनवाई में वह सिर्फ दो बार ही मौजूद रहीं.
इस पूरे मामले पर 'आजतक' ने जब दीपिका सिंह से बात की तो उन्होंने कहा कि यह खबर हैरान कर देने वाली है, इससे मुझे तकलीफ हुई है. मेरे यहां से पठानकोठ 250 किमी दूर है और कोई भी युवा वकील जम्मू में मुझसे जुड़ना नहीं चाहता है क्योंकि उन्हें मुझसे जुड़ने से डराया जाता है.
दीपिका ने कहा कि लोअर और हाई कोर्ट दोनों का काम मेरे ऊपर है और मैं वित्तीय संकट से जूझ रही हूं. पीड़िता के परिवार ने कभी मुझसे संपर्क नहीं किया. वह संपर्क से दूर हैं.
दीपिका ने कहा कि सुनवाई के लिए वह खुद एक दो बार जा चुकीं हैं. राज्य का मामला सार्वजनिक अभियोजक द्वारा संभाला जाता है. 2 सीनियर क्रिमिनल एडोकेट पठानकोट कोर्ट में वास्तव में इसे अच्छी तरह से संभालने में कामयाब रहे हैं. उस समय कोई नहीं था, मैं सबसे आगे थी, तब मेरी जरूरत थी, अब मेरी जरूरत नहीं है.
पीड़िता की वकील ने कहा कि मेरे जीवन के लिए कोई खतरा नहीं है. अगर मेरी वहां रहने की जरूरत पड़ी तो इससे मुझे कोई नहीं रोक सकता. लेकिन मुझे पेशेवर प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए यहां रहने की जरूरत है. कुछ नए चेहरे इसे भुनाने की कोशिश कर रहे हैं, मैं उन्हें शुभकामनाएं देती हूं. लेकिन उनका नाम नहीं लूंगा.
सुप्रीम कोर्ट ने दिया स्थानांतरित करने का आदेश
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने मामले को पठानकोट स्थानांतरित करने का आदेश दिया था. इसके अलावा इस मामले की सुनवाई बंद कमरे में और रोजाना आधार पर करने के भी निर्देश दिए. उनकी उपस्थिति और आशंका को ध्यान में रखा गया था कि जब भी वह पठानकोट जाते थे तो उन्हें उनके जीवन का खतरा होता था.
जम्मू एवं कश्मीर के कठुआ जिले के रासाना गांव में एक आठ वर्षीय लड़की लापता हो गई थी. उसका शव एक सप्ताह बाद उसी क्षेत्र से बरामद हुआ था. वकील-सामाजिक कार्यकर्ता दीपिका सिंह राजावत ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि जम्मू बार एसोसिएशन के सदस्य उसे धमका रहे हैं और उनसे अदालत में पेश नहीं होने के लिए कह रहे हैं.
इस पूरे मामले पर 'आजतक' ने जब दीपिका सिंह से बात की तो उन्होंने कहा कि यह खबर हैरान कर देने वाली है, इससे मुझे तकलीफ हुई है. मेरे यहां से पठानकोठ 250 किमी दूर है और कोई भी युवा वकील जम्मू में मुझसे जुड़ना नहीं चाहता है क्योंकि उन्हें मुझसे जुड़ने से डराया जाता है.
दीपिका ने कहा कि लोअर और हाई कोर्ट दोनों का काम मेरे ऊपर है और मैं वित्तीय संकट से जूझ रही हूं. पीड़िता के परिवार ने कभी मुझसे संपर्क नहीं किया. वह संपर्क से दूर हैं.
दीपिका ने कहा कि सुनवाई के लिए वह खुद एक दो बार जा चुकीं हैं. राज्य का मामला सार्वजनिक अभियोजक द्वारा संभाला जाता है. 2 सीनियर क्रिमिनल एडोकेट पठानकोट कोर्ट में वास्तव में इसे अच्छी तरह से संभालने में कामयाब रहे हैं. उस समय कोई नहीं था, मैं सबसे आगे थी, तब मेरी जरूरत थी, अब मेरी जरूरत नहीं है.
पीड़िता की वकील ने कहा कि मेरे जीवन के लिए कोई खतरा नहीं है. अगर मेरी वहां रहने की जरूरत पड़ी तो इससे मुझे कोई नहीं रोक सकता. लेकिन मुझे पेशेवर प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए यहां रहने की जरूरत है. कुछ नए चेहरे इसे भुनाने की कोशिश कर रहे हैं, मैं उन्हें शुभकामनाएं देती हूं. लेकिन उनका नाम नहीं लूंगा.
सुप्रीम कोर्ट ने दिया स्थानांतरित करने का आदेश
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने मामले को पठानकोट स्थानांतरित करने का आदेश दिया था. इसके अलावा इस मामले की सुनवाई बंद कमरे में और रोजाना आधार पर करने के भी निर्देश दिए. उनकी उपस्थिति और आशंका को ध्यान में रखा गया था कि जब भी वह पठानकोट जाते थे तो उन्हें उनके जीवन का खतरा होता था.
जम्मू एवं कश्मीर के कठुआ जिले के रासाना गांव में एक आठ वर्षीय लड़की लापता हो गई थी. उसका शव एक सप्ताह बाद उसी क्षेत्र से बरामद हुआ था. वकील-सामाजिक कार्यकर्ता दीपिका सिंह राजावत ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि जम्मू बार एसोसिएशन के सदस्य उसे धमका रहे हैं और उनसे अदालत में पेश नहीं होने के लिए कह रहे हैं.
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